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डॉ. वसंत श्रीवास दवरा रचित श्रीराम ज़ी की आरती ने मचाई धूम

neerajtimes.com नरगोड़ा (नारायणपुर) छत्तीसगढ़ – कहा जाता है कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी व्यक्ति किसी भी काम को आसानी से कर सकता है। आज हम बात करेंगे उस साधारण से व्यक्ति में असाधारण ज्ञान की जिनके पास सीमित साधन व ढेर सारी बाधाएँ थीं, लेकिन जिजीविषा के साथ उन्होंने स्वयं को साबित किया। इन्हें इनके काम के लिए आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।  इन्होंने अपना रास्ता नहीं बदला जिसका नतीजा आज पूरी दुनियां देख रही है। इनके धैर्य और मेहनत ने आखिरकार इन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया। जिस प्रकार से आग में तपाकर ही स्वर्ण आभूषण बनाया जाता है ठीक उसी प्रकार डॉ. वसंत श्रीवास “वसंत” एक साधारण से परिवार में जन्मे जिनके माता-पिता एक किसान रहे। इनका जन्म 26 जून 1978 को एक छोटे से गांव नरगोड़ा सीपत बिलासपुर छत्तीसगढ़ में हुआ। तकनीकी शिक्षा आदर्श औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कोनी बिलासपुर में व्यवसाय टर्नर का प्रशिक्षण के साथ ही साथ उच्च शिक्षा स्वध्यायी के रूप में एम.ए. इतिहास, समाजशास्त्र का अध्ययन किया एवं वर्ष 2002 से  2014 तक अतिथि व्यख्याता के पद पर आदर्श औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कोनी बिलासपुर में पदस्थ रहे एवम् 2014 से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर में नियमित प्रशिक्षण अधिकारी (टर्नर) के पद पर सेवा दे रहे है जहांँ छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ आदिवासी बच्चों को स्वरोजगार हेतु निः शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। आपका साहित्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान देते हुए विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती है जिसमें – सेन साम्राज्य , बसंत ऋतु , गुरु ज्ञान से, माँ का अहसास, बहनों का मान, कोरोना काल का शिक्षक, युवा आगाज, पर्यावरण, चौपाल, वक्त, मैं मजदूर हूँ, जन्मभूमि अभिनंदन, नारी-गाथा, बालिका दिवस, हौसला, सहज नही मिली आजादी, नारी गाथा,राष्ट्रीय पर्व नवशक्तियों का स्वरुप, चाँद में तिरंगा, और व्यंग्यात्मक कविताएं आदि शामिल हैं । कहानी- गुरु शिष्य, स्वभाव, बाहरी चमक,आदि की लघु कहनियाँ हैं। इसी श्रृंखला में संभवतः यह पहली बार होगा जब श्रीराम की आरती का आपने सृजन किया जो ऐतिहासिक और कालजयी रुप में जन-जन तक गुनगुनाया जा रहा है। जिसे म्यूजिक डायरेक्टर दीपक भाठिया के तरंग में जयपुर से सुमधुर गायक सुखीराम मंडा एवं मुंबई से सुप्रशिद्ध गायिका चन्द्राणी मुख़र्जी आवाज़ दिए है। जिसे एक्ट किये है सुश्री रेखा खत्री एवं सुखीराम मंडा जयपुर से।

साहित्य में योगदान महासचिव (अपना साहित्य मंच छत्तीसगढ़) , कन्नौजिया श्रीवास सहित्य मंच , राष्ट्रीय साहित्य मंच, साहित्यिक मित्रमंडल मंच जबलपुर, बस्तर पांति त्रैमाशिक सहित्यमंच, काव्य रसिक मंच एवं आराधिका साहित्य मंच एवं माता पिता पर समर्पित विमला साहित्यिक संस्थान मे सक्रिय सदस्य हैं। साहित्य के प्रति लगाव को देखते हुए डॉ. राम रतन श्रीवास “राधे राधे” (ब्रांड एंबेसडर भारत नेपाल पशुपतिनाथ अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नेपाल काठमांडू) के द्वारा आपका साहित्यिक उपनाम “वसंत” रखा गया जो साहित्य के क्षेत्र में  वसंत श्रीवास “वसंत” के नाम से जाना एवं पहचाने जाने लगा। इन सभी साहित्यिक उपलब्धि के कारण आपको काशी हिन्दी विद्यापीठ वाराणसी से विद्या वाचस्पति (डॉक्टर मानद उपाधि समकक्ष) से सम्मानित किया गया इसके अलावा आपको विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से लगभग तीन शतक सम्मानो से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ल्ड गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दो बार एवं इंडिया गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में तीन बार रचना को स्थान प्राप्त हो चुका है।

 

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