मनोरंजन

मुक्तक – श्याम कुंवर भारती

तेरी याद<>

जब कभी तेरी याद मुझे आए तो आ जाना।

आंख से मेरे आंसू छलक  जाए तो आ जाना।

लगा है नशा तेरे इश्क का उतरेगा नहीं कभी।

तेरे इंतजार में सांस निकल जाए तो आ जाना।

रेत का हा<>

पहले जी भर के प्यार जताया फिर दिल कुचल गया।

कभी कहा दिलवर जान बना के दुश्मन निकल गया।

कभी छोड़ेंगे न साथ जान बना या लेले तू मेरी जान।

थामना चाहा तेरा साथ रेत जैसे तू हाथों फिसल गया।

-श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड , मो०न० .9955509286

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