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साहिब ! – त्रिशिका धरा,

साहिब! हम ऋणी तुम्हारे, तुमने राम का मंदिर बना दिया।
भगवा-ए-हिन्द किया तुमने, तो हमने कमल खिला दिया।
हम पहले ही घायल थे, आरक्षण की तलवार से।
अब “सवर्ण” को कासा देके उसी, मंदिर के बाहर बिठा दिया।

— त्रिशिका धरा, कानपुर,  उत्तर प्रदेश

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