अब भारत का उद्घार नहीं
यह भारत के संस्कार नहीं
इक वृद्ध निहत्थे साधू पर
सौ सौ लठ्ठ प्रहार चले
था नीच पापियों का तांडव
रक्षा प्रहरी चुपचाप खड़े
वीर शिवाजी की धरती पर
रही खून में वह लौछार नहीं
अब भारत का……
यह कह इति श्री कर लेना
कि जनता थी अनभिज्ञ वहाँ
मानवता के भक्षक नायक
प्रशासन तो था विज्ञ वहाँ
क्यों छोड़ दिया वृद्धात्मा को
नरभक्षी कुत्तों के आगे
हो गई कलंकित वर्दी भी
जिसको पहने थे अभागे
धरती पर जीवित रहने का
तुमको है अधिकार नही
अब भारत का. ….
जिसने भी किया कुकृत्य वहाँ
उन्हें फाँसी पर चढ़ना होगा
कँप जाये धरा व आसमान
कुछ ऐसा ही करना होगा
ठाकरे के वश की बात कहाँ?
रही विश्वसनीय सरकार नहीं
अब भारत का……
अब भारत के हर प्रांगण में
शौर्य को चमकाना होगा
शस्त्रों की शिक्षा देकर
रक्षा कवच बनाना होगा
जब नहीं रहेंगे हम सहिष्णु
कुछ भी होगा स्वीकार नहीं
अब भारत का उद्धार नही
यह भारत के संस्कार नहीं
-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश