मनोरंजन

साहिब ! – त्रिशिका धरा,

साहिब! हम ऋणी तुम्हारे, तुमने राम का मंदिर बना दिया।
भगवा-ए-हिन्द किया तुमने, तो हमने कमल खिला दिया।
हम पहले ही घायल थे, आरक्षण की तलवार से।
अब “सवर्ण” को कासा देके उसी, मंदिर के बाहर बिठा दिया।

— त्रिशिका धरा, कानपुर,  उत्तर प्रदेश

Related posts

नरेन्द्र मोदी – सविता सिंह

newsadmin

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

newsadmin

बंगाल का सिद्ध शक्तिस्थल तारापीठ – शिव शंकर सिंह पारिजात

newsadmin

Leave a Comment