मनोरंजन

आओ मिले तुमसे – सविता सिंह

बहुत थोड़ा-सा रह गए हो तुम मुझमें,
बीते पलों की थकान और मुस्कान लिए।
द्वार पर खड़ी हूँ मैं,
बाँहें पसारे
प्रियतम जनवरी,
आओ तुमसे फिर मिलूँ।
दिसंबर में अब तो
कुछ ही घंटे शेष हैं,
पर बीते इन महीनों में जो अनुभव मिला
वह शायद
आने वाले जितने भी वर्ष शेष हैं,
आजीवन
मेरे साथ चलेगा।
स्वागत में, प्रियतम जनवरी के,
हम फिर से मिलते हैं
नए स्वप्नों, नई साँसों,
और बीते अनुभवों की
सहज मुस्कान के साथ।
सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

Related posts

साफ होनी चाहिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दिमागी गंदगी? -प्रियंका सौरभ

newsadmin

यमराज और यमराज मित्र – कुलदीप सिंह रुहेला

newsadmin

बदला ढंग समाज का – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

newsadmin

Leave a Comment