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इन्फ्लुएंसर की बात – डॉ सत्यवान सौरभ

कहाँ गए वो जो सच को बोलने वाले थे,

अब सब बिके हैं, जो भी उजाले वाले थे।

 

ये पोस्ट, ये वीडियो — बस नाटक बन गए,

कभी जो थे जनहित में, अब सौदे बन गए।

 

जिसको देखो वही सत्ता का गीत गाता है,

लाइक की खनक में सच भी झूठ हो जाता है।

 

जिस हाथ में कैमरा था सवाल पूछने को,

अब वो झुका है किसी ब्रांड की ऊँगली पकड़ने को।

 

‘मैं स्वतंत्र हूँ’, कहता है जो दिन-रात,

पर नहीं दिखाता “पेड” होने का जिक्र साथ।

 

चुनाव के दिनों में बन जाते हैं प्रवक्ता,

जनता को समझ नहीं आता  कौन है भक्त, कौन आलोचक।

 

ये दौर है जहाँ फॉलोअर्स की गिनती से,

ईमान तुलता है, विचार गिरवी रख दिए जाते हैं।

 

मगर ये मत भूलो —

जिस दिन जनता को सच का स्वाद लग जाएगा,

तुम्हारी हर पोस्ट पर बस ‘स्क्रॉल डाउन’ हो जाएगा।

— डॉ सत्यवान सौरभ, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045

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