( 1 ) उड़ी पतंग
चली उड़ी-उड़ी रे,
पार नभ के !!
( 2 ) हवा के संग
चली उड़ी-उड़ी रे,
नाचे मन रे !!
( 3 ) भरे उमंग
चली उड़ी-उड़ी रे,
भरे रंग रे !!
( 4 ) खिला सपने
चली उड़ी-उड़ी रे,
झूमें तन ये !!
( 5 ) पार गगन
चली उड़ी-उड़ी रे,
मग्न गाए रे !!
( 6 ) संग विहंग
चली उड़ी-उड़ी रे,
छेड़े तान ये !!
( 7 ) हर्षाए ऊँचे
चली उड़ी-उड़ी रे,
छूते गिरी ये !!
– सुनील गुप्ता
जयपुर,राजस्थान |