मनोरंजन

जोगी – अनुराधा पाण्डेय 

१*

हृदय तार वो झंकृत करता।

मिलने को उर सदा तरसता।

नैनों से फेंके शर सायक

क्या वह साजन?

.

.

धत री! नायक।।

२*

रोम रोम में मेरे बसता।

जब वो हँसता तब जग हँसता

ना वो मोदी ना ही योगी

क्या सखि भोगी?

.

ना री! जोगी

३*

उसकी आँखें कहे कहानी।

सस्मित अधर बड़ी मृदु बानी।

नहीं फकीरा नहीं कबीरा।

क्या वह दूत?

.

.

धत! अवधूत

अनुराधा पाण्डेय , द्वारिका , दिल्ली

 

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