मनोरंजन

क्रोध है सजा – सुनील गुप्ता

है क्रोध

एक ऐसी सजा

जो अग्नि में….,

स्वयं को जलाए चले  !!1!!

 

आए क्रोध

बोध न हो

चलें मारते कुल्हाड़ी….,

स्वयं ही पैरों पे !!2!!

 

है क्रोधाग्नि

एक ऐसी अग्नि

जो जलाए चले….,

संपूर्ण जीवन को हमारे !!3!!

 

क्रोधी जले

स्वयं आग में

मति मारी जाए….,

कुछ सूझे न सुझाए !!4!!

 

क्रोध बनें

विनाश का कारण

बुद्धि विवेक हरके….,

अध:पतन की ओर ले चले  !!5!!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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