मनोरंजन

गीता जयंती – सुनील गुप्ता

( 1 )” गी “, गीता

सुगीता चलें गाए,

आओ, गीता जयंती पर्व मनाएं  !

है श्रीहरि मुखारबिंद से ये निसृत वाणी,

आओ इसे पढ़ें पढ़ाएं, जीवन में लाएं !!

( 2 ) ” ता “, तारणहार

बनें गीता सबकी,

और भव सागर से ये, पार लगाए  !

आओ, चलें जीवन में इसे उतारते…,

और जीवन को स्वर्ग सरीखासा बनाएं !!

( 3 ) ” जयंती “, जयंती

पर्व उत्सव महोत्सव,

है ये बड़ा ही, शुभ पावस मंगल  !

आओ चलें बसाए, इसे हृदय में…,

मानुष जीवन को, बनाएं हर पल सुफल !!

– सुनील गुप्ता सुनीलानंद, जयपुर,राजस्थान |

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