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जिंदगी – रेखा मित्तल

रूठे हुए पुरुष

दौड़ाते हैं गाड़ियाँ

खुद को शांत करने की

करते नाकाम कोशिशें

जबकि रूठी हुई स्त्रियाँ

दौड़ती है रसोई घर की ओर

कर लेती है शांत खुद को

बनाकर पुरुष का मनपसंद भोजन

असमंजस में दोनों चले

पर विपरीत दिशाओं में

जबकि लौटना था

दोनों को एक दूसरे की ओर

– रेखा मित्तल, चण्डीगढ़

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