मनोरंजन

गीत (वार्णिक छंद) – निशा अतुल्य

बस आप ही प्रिय हो बसे हर श्वास में।

मन प्रेम चाहत ले उड़ा बस आस में।।

 

बसती बसा कर प्रेम की तुम हो गए।

महके सदा कुछ पुष्प जो खिलते नए।।

पर खोल के उड़ने लगी नभ पास में

मन प्रेम चाहत ले उड़ा बस आस में।।

 

गहरा समुंदर सा बसा कुछ ढूँढ़ती।

नयना भरे मन भाव चाहत गूँजती।।

घिरती रही सुख आस लेकर त्रास में

मन प्रेम चाहत ले उड़ा बस आस में।।

 

मिलते सदा सुख नेह प्रेमिल जागते।

उतरे सभी मन भाव सागर नापते।।

अब साथ साजन जी रहो मधु मास में।

मन प्रेम चाहत ले उड़ा बस आस में।।

– निशा अतुल्य 5/11, विष्णु रोड,

देहरादून, उत्तराखंड

 

Related posts

दोहे (देह) – मधु शुक्ला

newsadmin

भारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों? – प्रियंका सौरभ

newsadmin

सावन – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment