तेरी नफरत भरी आवाज़ है ये मैं नहीं कहता !
तेरा किरदार धोखेवाज है ये मैं नहीं कहता !
बड़ी इज्जत तेरे दरबार में है चाटुकारों की ,
तुझे उन पे बहुत ही नाज़ है ये मैं नहीं कहता !
डरा है आइना तुझसे तेरे चेहरे को दिखला के ,
सुना है उससे तू नाराज़ है ये मैं नहीं कहता !
रखे चेले बनाकर तू सदा अपनी हिफाज़त में ,
तुझे खतरे का कुछ अंदाज़ है ये मैं नहीं कहता !
जमाने भर को शंका है तेरे रुतबे में साजिश की,
किसी का छीन पहना ताज है ये मैं नहीं कहता !
अना को ताक पर रख कर तुझे ये जीत पायी है ,
तेरा संगीत ही बिन साज है ये मैं नहीं कहता !
चलेगा नेक नीयत से बढ़ेगा और भी आगे ,
वही करता सभी के काज है ये मैं नहीं कहता !
खुदा से खौफ खा “हलधर” ज़फा मत कर खुदाई में ,
उसी के हाथ में परवाज़ है ये मैं नहीं कहता !
– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून