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ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

तेरी नफरत भरी आवाज़ है ये मैं नहीं कहता !

तेरा किरदार धोखेवाज है ये मैं नहीं कहता !

 

बड़ी इज्जत तेरे दरबार में है चाटुकारों की ,

तुझे उन पे बहुत ही नाज़ है ये मैं नहीं कहता !

 

डरा है आइना तुझसे तेरे चेहरे को दिखला के ,

सुना है उससे तू नाराज़ है ये मैं नहीं कहता !

 

रखे चेले बनाकर तू सदा अपनी हिफाज़त में ,

तुझे खतरे का कुछ अंदाज़ है ये मैं नहीं कहता !

 

जमाने भर को शंका है तेरे रुतबे में साजिश की,

किसी का छीन पहना ताज  है ये मैं नहीं कहता !

 

अना को ताक पर रख कर तुझे ये जीत पायी है ,

तेरा संगीत ही बिन साज है ये मैं नहीं कहता !

 

चलेगा नेक नीयत से बढ़ेगा और भी आगे ,

वही करता सभी के काज है ये मैं नहीं कहता !

 

खुदा से खौफ खा “हलधर” ज़फा मत कर खुदाई में ,

उसी के हाथ में परवाज़ है ये मैं नहीं कहता !

– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

 

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