मनोरंजन

गीत – मधु शुक्ला

हमें प्रेरणा देता दिनकर,

हितकारी मन रखने की ।

समता का हम आदर सीखें ,

बात बुरी छल करने की।।

 

दूर रखें आलस को खुद से,

मोल समय का पहचानें।

हिम्मत और लगन के द्वारा,

हम  वह  पाते  जो  ठानें।

मनुज तभी ओजस्वी बनता,

करता कोशिश बढ़ने की…. ।

 

नियमों का पालन करने से ,

व्यक्तित्व  निखर  जाता है।

काम न कोई मुश्किल लगता,

सहज  लक्ष्य  को  पाता  है।

मनोकामना  पूरी   होती,

आशा विजयी बनने की…… ।

 

जलना होगा पता सूर्य को .

लेकिन  तत्पर  रहता  है ।

जग को सुख देने की खातिर,

कष्ट अनेकों सहता है।

दिनकर के पदचिन्हों पर हम ,

आदत डालें चलने की…. ।

— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

Related posts

वीरता – निहारिका झा

newsadmin

मासूम बचपन की – राधा शैलेन्द्र

newsadmin

गीत (सरस्वती वंदना) – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

Leave a Comment