छोटे-छोटे फूल खिलें,
रंग-बिरंगे खुशबू मिलें।
तितलियाँ रंग बिखेरें,
गुनगुनाएँ मधुर स्वर करें।
पेड़-झाड़ों की छाँव तले,
खेलें बच्चे हँसते-मुहँफट।
खुशियों से भरा ये बगीचा,
हम सबका प्यारा आशियाना।
आओ मिलकर हम बचपन,
खुशियों से सजाएं मन।
खेलें, गाएँ, मुस्कुराएँ,
खुशियों का बगीचा लगाएँ।
-डॉo सत्यवान सौरभ 333,
परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी) भिवानी,
हरियाणा – 127045