मनोरंजन

दिल ने कहा – सविता सिंह

आज फिर धड़कन बढ़ी

आये जब वो सामने।

लगा कि शायद बदले

पूर्ववत थे अनमने।

कभी तो तू भी बदल

कभी तो हम भी तने।

चल ऐ दिल यकीन कर

अब भला कैसे बने।

बहा दिए तारीखें

उन पलों से थे सने।

सविता सिंह मीरा

जमशेदपुर

Related posts

मां कात्यायिनी (षष्ठ रूप) – डा० क्षमा कौशिक

newsadmin

धर्म चिंतन दिव्यानंदम – टी. एस. शान्ति

newsadmin

दिल को चुराया नहीं होता – अनिरुद्ध कुमार

newsadmin

Leave a Comment