मनोरंजन

एक फैशन बन गया हर उत्सव – गुरुदीन वर्मा

\(शेर)- वो ख्वाब जो देखे थे हमने, आज़ाद हुआ जब हिन्दुस्तां।

साकार हुए हैं कितने स्वप्न, कितने बाकी है अब अरमां।।

क्या चैनो-अमन है हर जगहां, क्या रोशन है हर घर यहाँ।

क्या बन्द हुआ है लहू का बहना, आबाद हुए क्या मुफ़लिस यहाँ।।

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एक फैशन बन गया हर उत्सव, मनोरंजन का एक जरिया।

क्या सीखा हमने उत्सवों से, एक शौक इनको बना लिया।।

एक फैशन बन गया हर उत्सव————–।।

 

यहाँ फूल खिले हैं कागज के, होगी कैसी बहारे-चमन।

नकली हंसी है चेहरों पे, क्यों होगा उनका सच्चा मन।।

रोशन हैं जो जुगनू यहाँ, कल तक वो गुम हो जायेंगे।

क्या पाया हमने उत्सवों से, एक रस्म इनको बना लिया।।

एक फैशन बन गया हर उत्सव————–।।

 

कितने वादें यहाँ हमने किये, और कितने पूरे करेंगे हम।

क्या कल को रहेगा यही प्रेम, क्या वादें भूल जायेंगे हम।।

किसको फुरसत है अब इतनी, वो सोचे सबके बारे में।

रहेगा याद हमें इसी पल, एक नशा इनको बना लिया।।

एक फैशन बन गया हर उत्सव—————।।

 

क्यों बहता है अब भी लहू यहाँ, क्यों किसके लिए हम लड़ते हैं।

कब मिटेगी आखिर यह नफरत, मन क्यों नहीं पवित्र करते हैं।।

मत टुकड़े करो और भारत के, तुम राम,रहीम, नानक के लिए।

बर्बाद करो मत किसी को, एक खेल इनको क्यों बना लिया।।

एक फैशन बन गया हर उत्सव—————।।

– गुरुदीन वर्माआज़ाद, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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