मनोरंजन

गीतिका – मधु शुक्ला  

 

सुख दुख मिलकर जहाँ बाँटते,

कहलाता परिवार।

प्रीत परस्पर त्याग भाव ही,

जीने का आधार।

 

जीवन पथ के कंटक जब – जब,

भटकाते हैं ध्यान।

राह दिखाये साथ निभाये,

अपनापन हर बार।

 

सद्भावों की जननी घर है,

मिले यहाँ हर सीख।

परिपक्व यहाँ मन होता है,

पाकर स्नेह दुलार।

 

तालमेल की सीख यहाँ पर ,

मिले क्षमा का दान ।

उत्साहित मन रहे हमेशा,

उपजें श्रेष्ठ विचार।

 

सकल विश्व परिवार हमारा,

जब हो मन में भाव।

मानवता को मिले बढ़ावा,

अमन बढ़े संसार ।

— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

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