मनोरंजन

आँय-बाँय बिजली बिल – अशोक यादव

 

कोरबा ल सब कहिथें संगी ऊर्जा के नगरी,

इहाँ कई ठन हवय कोइला के बड़का खदान।

बड़े-बड़े बाँधा ले उत्पन्न होवत हे जल विद्युत,

फेर ए बिजली बिल ह ले डरिस हमर परान।।

 

कतको झन के छितका कुरिया म बाघ गुर्राथे,

कई जनता मन हें रोज कमाने अउ खाने वाला।

दुबर ल दू आषाढ़ वाले काम करत हे सरकार,

लोगन हें गरीबी रेखा ले नीचे जीवन जीने वाला।।

 

बल्ब मन घलो हाँसत हें, पंखा मन मारत हें ताना,

स्मार्ट मीटर ले बिजली बिल निकलथे साँय-साँय।

हमर राज के बिजली कहाँ जाथे, पुछत हे जनता,

घरों-घर म बिजली बिल ह आवत हे आँय-बाँय।।

 

गरीब मन ह कहाँ लगवाए सकहीं सोलर पैनल ल,

बेंदरा मन ह जझरंग ले कूद के टोर दिहीं ओला।

अभी भी समय हे, हाफ बिजली बिल कर दे लागू,

जनता के गुस्सा भोगागे हे, धरा दिहीं तोला झोला।।

– अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़

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