एक तरफ है जन्म दात्री दूसरी तरफ मा आदिशक्ति।
एक ने जन्म दिया है दूसरी मां की करते सभी भक्ति।
जितनी हो जगदंबा की भक्ति उससे कम न जननी की।
मां है देवी माता की माता की भक्ति में कमी न हो रत्ती।
जिसने गोद में खेलाया आंचल में सुलाया मां है महान।
किया गर जननी भक्ति खुश होती माता बढ़ती आशक्ति।
दोनों माताओं मिले कृपा जीवन खुशहाल है हो जाता।
दिखावे की भक्ति मिले न रत्ती मत करो भक्ति सस्ती।
छांव मा के आंचल का तरसते ऋषि मुनि देवता किन्नर।
करती भव पार मां भंवर अगर भारती नाव है अटकी।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड