प्यार से हमे देखे,यार अब निहारे भी।
पास उसके हम बैठे हाय क्यो पुकारे भी।
आशिकी मे हम तुमको राज ये बताते हैं।
प्यार तुम्हे करते हैं दिल से आज हारे भी।
दर्द हाय बढता है अब सहा नही जाता।
चैन भी नही मिलता रात दिन पुकारे भी।
दर्द अब ये तेरा है, साथ ही सहेगे हम।
संग संग है जीना,वक्त अब गुजारे भी।
खो गये थे ग़फ़लत मे,भूल बैठे सब अपना।
साथ मेरा तुम देना, भूल जा ख़सारे भी।
दिल से तुमको चाहा है,वस्ल ही हकीकत है।
आस्मां झुका दे हम, तोड़ ले सितारे भी।
मौत भी सदा डरती पास वो नही आये।
प्रेम देख अब ऋतु का,मौत कुछ बिचारे भी।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़