अलक पलक झलक तोर देखली ये मईया।
अजब गजब कइलू ये मईया हो सिंगार ।
चम चम चमके ललकी चुनरिया ये मईया।
ललकी टिकुली लगवलु ये मईया हो लिलार।
कारी कारी केसिया तोहरे कंधवा पर झूले।
सोनवा के नथुनी माई तोहरे गलवा पर झूले।
झुकी झुकी चरणीया तोर पखारी ये मइया।
दया करा बलकवा ये मईया करा तनी विचार।
अजब गजब कइलू ये मइया……..।
रूपवा तोर निराला सूरज के अंजोरिया जस बुझाला।
ललकी सड़िया मे गोटवा सितारा जस टिमटिमाला।
बघवा पर चढ़ी के ये मईया आ जा तनी ललकार।
अजब गजब कइलू ये मईया……।
बड़ी बड़ी अंखियां में करिया कजरा लगवलु।
गरवा में हीरा मोतिया के हरवा पहिनलू।
रोई रोई भगता गुहारे ये भवानी मइया।
फेरी दा नजरिया भारती ओरिया सुनी ला पुकार।
अजब गजब कइलू ये मइया हो सिंगार।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड