मनोरंजन

तुम गए तो सिर्फ़ सन्नाटा नहीं आया – रुचि मित्तल

 

हर तरफ़ एक अधूरी सी दुआ भी छूट गई

बातें रुक गईं, साँसें थम गईं

मगर दिल की धड़कन

अब भी तुम्हारा नाम लेती है।

कभी इक शाम तुम्हारी याद बन कर

आँखों से उतरती है चुपचाप

कभी ख़्वाबों में आकर

तुम्हारे साए को भी ढूँढती है मेरी बात।

ये जो प्यास है

ये पानी से बुझने वाली नहीं

ये तेरे “पास” के अहसास की प्यास है

मैंने बहुत बार बादलों से कहा

“बरस जाओ”… शायद कुछ राहत मिले

मगर जो भीगता है उसमें

वो चेहरा तो तुम्हारा होता नहीं

अब तो हवाओं में भी

तुम्हारी आहट की तलाश रहती है।

और चाँदनी…

वो भी अधूरी लगती है तेरे बिना

कोई छू ले मेरे दिल को

तो दर्द से पहले

तेरा नाम निकल आता है

बिरह की ये प्यास

ना ज़बां से कह सकी

ना आँखों से बुझ सकी

शायद इसे सिर्फ़

तेरा लौट आना ही बुझा सकता है।

©रुचि मित्तल, झझर, हरियाणा

 

Related posts

मंत्र जाप, दूर करे जीवन के शाप – सुनील गुप्ता

newsadmin

कविता – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

धन्य मैं हो गयी धन्य तुम हो गये – अनुराधा पांडेय

newsadmin

Leave a Comment