मनोरंजन

प्रणयन गीत – अनुराधा

 

तेरी यादों में रत रहना, अच्छा लगता है…..।

मुझको तेरा पागल कहना,अच्छा लगता है… ।

ऐसे तो होगीं जग भर में,

कितनों के हित कितनी राहें।

मुझको पर पावन लगती है,

केवल विहगे ! तेरी बाँहें ।

तेरे घर का बस पथ गहना,अच्छा लगता है ।

मुझको तेरा पागल कहना,अच्छा लगता है ।

धूप छाँव आतप आँधी सब,

लगते मुझको खेल -खिलौने ।

जीवन में तेरे बिन मुझको ,

कभी न भाते नर्म बिछौने।

तेरे हित शत-शत व्रण सहना,अच्छा लगता है ।

मुझको तेरा पागल कहना,अच्छा लगता है ।

-अनुराधा पांडेय, द्वारिका, दिल्ली

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