मनोरंजननिरंतर – सविता सिंह by newsadminSeptember 20, 2025September 20, 20250206 Share0 कभी एकांत में कहाँ रह पाती हूँ, जैसे गर्भ में शिशु पलता है माँ की साँसों के सहारे, वैसे ही तुम धड़कते रहते हो मेरे अंतर में निरंतर। इसका समय केवल नौ माह का नहीं, यह तो ताउम्र का है अविरल, अनवरत, अनन्त। – सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर