मनोरंजन

सुकून- सविता सिंह

 

सुकून की तलाश में

वह भटकता पथिक।

मृग मरिचिका की ही भांति

उसे होता दूर से कुछ प्रतीत।

अंततः उसने किया आँकलन

औऱ भीतर ही पाया कस्तूरी।

सुकून पूर्ण।

तत्पश्चात!!

सविता सिंह मीरा , जमशेदपुर

Related posts

खिल गया दिग दिगंत – डॉ. सत्यवान सौरभ

newsadmin

नायक राजा सिंह, वीर चक्र (मरणोपरान्त) – हरी राम यादव

newsadmin

बदलाव – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment