चला हूँ अब मैं यहाँ से, लेकिन कहाँ को मैं चला।
क्या करूँ किससे शिकायत, क्यों यहाँ से मैं चला।।
चला हूँ अब मैं यहाँ से—————–।।
ऐसा भी क्यों मैं कहूँ कि, मिला नहीं कोई अच्छा।
सवाल यही है दिल में, अकेला यहाँ से क्यों मैं चला।।
चला हूँ अब मैं यहाँ से——————।।
अच्छा तो यह होता कि, मुझको नहीं अपना कहते।
मैं भी नहीं बदलता यूँ , किससे मेरा दिल यह जला।।
चला हूँ अब मैं यहाँ से——————-।।
अफसोस तुमको क्या है दोस्त, कहते नहीं क्यों कुछ भी तुम।
आँसू क्यों बहाते हो तुम, क्या नहीं तुमको मुझसे मिला।।
चला हूँ अब मैं यहाँ से——————–।।
मैं भी दुहायें तेरी तरहां, मांग रहा हूँ मालिक से।
फिर से कहाँ कब लगेगा, अपने मिलन का ऐसा मेला।।
चला हूँ अब मैं यहाँ से——————–।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)