मनोरंजन

‘मैं शब्द हूँ ‘ – इंद्रसेन यादव

जी हाँ !

मैं शब्द हूँ

मैं खुशी देता हूँ …गर

मेरा उपयोग संयम से करो

तो मैं बहुत कोमल भी हूँ

यदि संयम टूटा

तो मैं कठोर भी हूँ

जी हाँ!

मैं शब्द हूँ …

मेरे साथ तनिक भी छेड़छाड़ हुई

तो मैं चुभ जाता हूँ

चुभता भी इस कदर हूँ

कि चिर के रिश्ते को भी

चिरकाल के लिए

चीर देता हूँ …

जी हाँ!

मैं शब्द हूँ …।

– इंद्रसेन यादव ‘प्रवक्ता’ (हिंदी)

आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

Related posts

डॉ.ओम प्रकाश मिश्र “मधुव्रत” की एक अत्यंत संवेदनशील रचना- अनिकेत नहीं हूँ मैं!

newsadmin

व्यक्त कर पाए – ज्योत्सना जोशी

newsadmin

गजल – ऋतु गुलाटी

newsadmin

Leave a Comment