गुरु सम नहीं कोई उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
ज्ञान प्रकाश करे शुभकारी।
सब प्रकार गुरु मंगल कारी।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
ज्ञान पुंज रवि सम गुरु जानो।
गुरु की महिमा को पहचानो।।
शरण गुरु की जो भी आया।
सार तत्त्व जीवन का पाया।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की जग में महिमा न्यारी।।
लख चौरासी नर तन पाया।
उस पर विकट जगत की माया।।
ज्ञान-शलाका जो गुरु लाये।
सकल कलुष मन गलता जाये।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
गुरु वशिष्ठ ने राम उबारे।
संदीपन गुरु कृष्ण सँवारे।।
गुरु द्रोण अर्जुन को साधा।
बने सहाय हरी सब बाधा।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
गुरु कृपा जिस पर सुखकारी।
वो नर रहे न दीन दुखारी।।
दया-दृष्टि जिस पर पड़ जाये।
सुख-संपद यश शुभ-गति पाये।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
गुरु काटे भव संकट भारी।
कह-कह महिमा वाणी हारी।।
वेद पुराण यशोगुण गाते।
परमेश्वर झुक शीश नवाते।।
**गुरु सम कोई नहीं उपकारी।
गुरु की महिमा जग में न्यारी।।
– श्रद्धानवत डॉ क्षमा कौशिक,
देहरादून , उत्तराखंड