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एम० ए० पास लड़कियां – रेखा मित्तल

 

हिंदी में  एम० ए० पास लड़कियां

अचानक से ब्याह दी जाती हैं

फिर वह लेकर नई आशाएं

घर आंगन में बो देती हैं कविताएं

रोज टिफिन में परोसती हैं

अलंकारों से सजाकर

समास और छंदों में करती हैं

व्यक्त अपनी अधूरी भावनाएं

रसोई के डिब्बों में खोजती हैं

अल्हड़ जवानी के अधकचरे ख्वाब

मेजपोश की कढ़ाई में बुनती हैं

अपने जीवन के अनसुलझे जवाब

दिनकर और निराला की कविताओं संग

रोज करती हैं नए अध्याय की शुरुआत

अपने मनोभावों को कर विसर्जित

रोज जीती हैं, रोज मरती हैं

ढूंढती रहती हैं खुद को

लेखकों की किस्से कहानियों में

तलाशती हैं अपना वजूद

काग़ज़ में उकेरे स्याही के शब्दों में

करती हैं प्रयास सामंजस्य बिठाने का

अपने नए पुराने संबंधों में

हिंदी में एम० ए०  पास लड़कियां

अचानक ब्याह दी जाती है

– रेखा मित्तल, चंडीगढ़

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