हे बजरंगबली सुन लो मेरी पुकार,
हम सब आये है तेरे द्वार पर,
विनती हमारी सुन लो पवन पुत्र,
हृदय में हमारे विराजो हे महाबल।
वाणी में ऐसी शक्ति हमको दे दो,
राम नाम का मैं गुणगान करता रहूं,
हे पवन पुत्र श्री हनुमान जी ,
आप ही तो बल बुद्धि के धाम हो।
मा जानकी के तुम अति प्रिय हो,
सुग्रीव जी के तुम मंत्री हो,
जो भी तुम्हारा नाम जपता है,
उसकी हर विपदा को हर लेते हो।
प्रभु श्रीराम के तुम अति प्रिय हो,
भरत लाल के तुम सखा हो,
केसरी नंदन सबको सुमति दे दो,
हम तुमको शत् शत् वंदन करते हैं।
– कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड