आई गइल रक्षा बंधन के त्यौहार हो ,
हरदम बनल रही भाई बहिन के प्यार हो।
जइसे मिलल माई बाप के हमके दुलार हो ।
तोहरे खातिर रहब बहिना हरदम हम तइयार हो।
सावन के महीनवा में पुरनीमवा के दिनवा में ।
हर साल आवेला राखी के त्योहार हो।
हरदम बनल रही …………।
जनम जनम के नाता हमरो टूटी नाहीं कबहुं।
भरल पुरल रहो बहिना तोहरो घर संसार हो।
हरदम बनल रही …………….।
रखिया के धागा बाड़े प्रेमवा के आधार हो।
बांधा हाली कलाई राखी देइब उपहार हो ।
हरदम बनल रही…………..।
जब जब जरूरत पड़े बहिना हमके याद करीह।
जिनीगीया करब तोहपे हम न्यौछार हो।
हरदम बनल रही भाई बहिन के प्यार हो।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर )
बोकारो ,झारखंड , मोब.9955509286