सामने वाले को कभी तुच्छ मत मानियेगा,
घटिया कहेँगे लोग कवि व्यवहार को !
नये नये कवियों का हौसला बढ़ाओगे तो,
दिल में सजा के वो रखेंगे इस प्यार को !
साहित्य के साधकों से एक अनुरोध मेरा,
सुचिता के साथ करो मंच कारोबार को !
अच्छी नीतियों के लिए शान में क़सीदे पढ़ो,
बुरी नीतियों के लिए घेरो सरकार को !
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून