neerajtimes.com – शैली ने बचपन से अब तक बड़े ही कष्टों से जीवन बिताया था घर में अकेली थी मां पिता की लाडली थी। अच्छी शिक्षा और अंत में अच्छी नौकरी उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई थी। अब उसे शादी कर लेने के बाद नए परिवार में भी सबसे मिलजुल कर खुशी-खुशी निभाना चाहिए था। मां पिता ने जिस भी लड़के से शादी करने को कहा था शैली ने उसे स्वीकार कर लिया था। ससुराल में सभी लोगों की सुबह की चाय नाश्ता और लंच करने के बाद ही वो अपनी तैयारी करती थी। धीरे धीरे उसने ससुराल के सारे तौर तरीके सीख लिए। पति को भी शैली से कोई शिकायत नहीं थी। एक दिन उसकी चाची सास उनके घर रहने आ गई। और उसने शैली के कामों में मिन मेख निकालना चालू कर दिया। पति सारा दिन बाहर रात में घर लौट ते थे। उन्हें कोई खबर नहीं थी। शैली ने अपनी सहेली दीपा को बताया कि चाची सास उसे परेशान कर रही है। दीपा ने उसे समझाया कि थोड़े दिन बाद चाची सास चले जाएगी तू थोड़ा सब्र से काम ले। शैली ने चुप चाप रहके सभी बाते सहन करने लगी। सबकी नजर शैली के व्यवहार पे ही थी। घर बाहर नौकरी सब कुछ अच्छे से निबाहे जा रही थी। एक दिन चाची सास बड़ी बीमार हो गई। शैली ने ही फिर उनकी सेवा की दवा दी। समय पर हर काम खुशी खुशी करने में सक्षम हो गई थी। चाची सास जल्दी ही ठीक हो गई। इस तरह चाची सास के दिल में शैली ने खास जगह बना ली थी। अब वो शैली को अपनी बेटी की तरह बहुत प्यार करने लगी थी। दीपा की सलाह से शैली समझ दार बनगई।
– जया भराड़े बड़ोदकर, टाटा सीरी न। , टावर १A। , ठाणे, मुंबई (महाराष्ट्र)