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मेरा मकाम क्या ? – नीलकान्त सिंह नील

 

मैं बाप हूं  मैंने खाब बेचे,

तो खाब सबके खरीद लाया।

मैं वो हूं जिसने अजाब झेले,

तो आप लोगों ने चैन पाया।

मुझे जो बदले में मिल रहा है

सिला ये क्या हैं?

इनाम क्या है ?

मेरा बताओ मकाम क्या है?

कभी सुनो लाडलो तुम,

मेरा फ़साना मेरी कहानी,

कभी तो पूछो कहां गई है,

मेरी वो रंगों भरी जवानी।

तो याद रखना तुम्हारी खातिर,

तुम्हारे बचपन पे वार दी है,

तुम्हें मैं पहले जवान कर लूं ,

ये करते करते गुजार दी है

गुजर गई है तो सोचता हूं ।

गुजर रही है तो शाम क्या है,

मेरा बताओ मकाम क्या है ?

मेरा बताओ मकाम क्या है?

– नीलकान्त सिंह नील, बेगूसराय, बिहार

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