छुट्टी की घंटी बजी,
खेलने चले सभी।
दोस्ती की गली में,
मस्ती के रंग छिपे।
गोल-गोल गेंद फेंकें,
हँसी से आँगन महके।
छुपन-छुपाई खेलें,
हर दिल खुशी से झूमे।
धूप में पसीना बहाएं,
ठंडी छाँव में आराम पाएं।
खेल-खेल में बढ़े बल,
खुशियों से भरे कल।
दोस्तों संग खेलना प्यारा,
हर दिन हो ये न्यारा।
खेल की ये दुनिया रंगीन,
बचपन का सपना हसीन।