मनोरंजन

 खेल की दुनिया – डॉ. सत्यवान सौरभ

 

छुट्टी की घंटी बजी,

खेलने चले सभी।

दोस्ती की गली में,

मस्ती के रंग छिपे।

 

गोल-गोल गेंद फेंकें,

हँसी से आँगन महके।

छुपन-छुपाई खेलें,

हर दिल खुशी से झूमे।

 

धूप में पसीना बहाएं,

ठंडी छाँव में आराम पाएं।

खेल-खेल में बढ़े बल,

खुशियों से भरे कल।

 

दोस्तों संग खेलना प्यारा,

हर दिन हो ये न्यारा।

खेल की ये दुनिया रंगीन,

बचपन का सपना हसीन।

Related posts

दोहे – मधु शुकला

newsadmin

पर्दा उठता झूठ का – डॉo सत्यवान सौरभ

newsadmin

सावन मनभावन : भीगते मौसम में साहित्य और संवेदना की हरियाली – डॉ सत्यवान सौरभ

newsadmin

Leave a Comment