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दुखी न हो – सविता सिंह

 

दुखी न होना चाहिए, चाहे जो हो यार।

श्रम जो करते हैं सदा, कैसे उनकी हार।।

 

काम धाम सब छोड़ कर, क्यों बैठे हो आप।

दुखी न होना चाहिए, मत कर तू संताप।।

 

सुख-दुख दोनों साथ हैं, होना नहीं अधीर।

दुखी न होना चाहिए, नैनन क्यों है नीर।।

 

करिए पूजा अर्चना, ले भगवन का नाम।

दुखी न होना चाहिए, उनके चरणों धाम.।।

– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

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