राष्ट्रीय

पद्मश्री कवि सुरेन्द्र दुबे को प्रेरणा ने दी श्रद्धांजलि 

 

neerajtimes.com जबलपुर – दुर्ग के बेमेतरा छत्तीसगढ़ में जन्मे आदरणीय सुरेन्द्र दुबे जी जो कामिक कविताओं के व्यंग्यवादी लेखक,कुशल वक्ता जिनको लोगों को हँसाने में महारत हासिल थी। जो पेशे से एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी थे। आप अत्यंत मृदु भाषी और सरल, सज्जन व्यक्ति थे। आपको २००८ में काका हाथरसी रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया और आपके द्वारा साहित्य के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व योगदान के लिए २०१० में भारत का चौथा सर्वोच्च पुरस्कार पद्मश्री से आपको सम्मानित किया गया। आपकी रचनाएं आजीवन लोगों को हँसातीं रहीं पर आज आप जाते- जाते सबको रुला गए। आपके जाने से हिंदी साहित्य जगत को जो नुकसान हुआ है उसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपको अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
पद्म श्री सुरेन्द्र दुबे वरिष्ठ कवि के असामायिक निधन पर कवि संगम त्रिपाठी, डॉ मुकुल तिवारी, तरुणा खरे ‘तनु’, प्रीति नामदेव ‘ भूमिजा ‘ , इंद्रजीत सिंह राजपूत, संध्या शुक्ला, गुलजारी लाल जैन, विजय शंकर पाण्डेय, पवनेश मिश्रा, उमा सुहाने, पप्पू सोनी, रामगोपाल फरक्या, दुर्वा दुर्गेश वारिक, हरिश परमार, सन्द्रा लोटवान, गोवर्धन दास, डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, सुरेन्द्र दुबे वरिष्ठ पत्रकार , हरिश परमार, मंजू अशोक राजाभोज ने श्रद्धांजलि दी।

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