मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

 

बिन तुम्हारे ये दिल खिला कब है,

साथ तेरा  सदा,मिला कब है।

 

रात दिन देखता ख्यालो मे,

सच मे अपनों से मिला कब है।

 

माँ के जैसा नही कोई होता,

उसको लखते जिगर गिला कब है।

 

सामना  खूब मौत का कुर्बत से,

मौत के सामने हिला कब है।

 

हो गये हैं शहीद वतन खातिर,

दुशमनों से कमर किया कब है।

 

साथ रहता है चाँद अब उसके,

चाँदनी के बिना  खिला कब है।

 

जिंदगी डूब जाती लहरो में,

आदमी मौत से लड़ा कब है।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

Related posts

हे माँ शारदे – कालिका प्रसाद

newsadmin

खरीखरी – ज्योत्सना जोशी

newsadmin

हमारे प्रेरक बापू शास्त्रीजी – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment