मोम माँ का ज़िगर है तो बाप भी चट्टान है ।
माँ हवा की लोरियां तो बाप ही तूफान है ।।
ढाल माँ संतान की तो बाप भी कृपाण है ,
पाठशाला मात है तो बाप ही इम्तहान है ।
बाप का दिल नारियल सा खोलकर देखो ज़रा,
रस भरा अंतस में जिसके पापड़ी मिष्ठान है ।
माँ सिखाती है सलीका प्यार का व्यवहार का ,
हार में भी जीत खोजे बाप वो इंसान है ।
जब कभी वहसी हवायें छेड़ती औलाद को ,
बाप को उस वक्त मानो मौत का फरमान है ।
डाँटने से बाप के सजती सँवरती जिंदगी ,
मात ममता चांदनी तो बाप भी दिनमान है ।
जब निराशा बालकों की रोकने लगती डगर,
कामयाबी के सफर का बाप ही प्रतिमान है ।
बाप ही वो देवता है जिसने दी है जिंदगी ,
बाप के सौजन्य से ‘हलधर’ मिला सम्मान है ।
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून