मनोरंजन

जय हनुमंत – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 

जेठ के बड़े मंगल दूर करें अमंगल,

पवनसुत की कृपा सदा मिलती रहे।

 

चालीसा हनुमान की रचना गुणगान की,

बजरंगी के नाम की जोत जलती रहे।

 

पाठ सुबह शाम हो अधरों पे नाम हो,

कृपा पाने की आस मन में पलती रहे।

 

सजता चोला सिंदूरी करते वो आस पूरी,

छवि मारुति की मन में बसती रहे।

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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