मनोरंजन

छलावा – श्याम सुंदर

 

उस धरा से

इस धरा तक

उस गगन से

इस गगन तक

उस जहां से

इस जहां तक

उस परिवेश से

इस परिवेश तक

उस गांव से

इस शहर तक

का सफर…

रहा नहीं आसान

जिसने बदल दिए

सारे अरमान…

अपनों के साथ

जीने का सपना

बन कर…

रह जाएगा सपना

जो हो नहीं सकता

अब कभी अपना

अब अपनों को…

नहीं दे पाते वो सम्मान

जो थे कभी जीवन की जान

– श्याम सुंदर, 71/27, गली नंबर -11,

शांति नगर , मनी माजरा, चण्डीगढ़ .

 

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