जनता के सवालों के बीच,
खो गई है कहीं आपकी राह,
ट्विटर के तीर चलाते हो,
इंस्टाग्राम के जाल बुनते हो।
काम की बात कहो, या दिखावा,
लाइक्स के पीछे भागते हो।
रिपोर्ट नहीं, रील बनाते हो,
कागज नहीं, कैप्शन सजाते हो।
सुना है कहीं आपकी आवाज़,
पर जनता सुनती नहीं,
जब फ़ोन पर फोटो लेने में,
खो जाती है पूरी जिम्मेदारी।
जमीन पर जो ठोकर खाए,
क्या उनकी परवाह है?
या डिजिटल दर्पण में,
सिर्फ अपना अक्स तलाशते हो?
लेकिन उम्मीद बची है,
कहीं जो सच में काम करें,
मौन में भी जो सुन लें,
दर्द को समझें, ना केवल दिखाएं।
आईएएस हो या कोई भी पद,
ज़िम्मेदारी से न हो कोई छूट।
ड्यूटी को भूलो मत,
स्टारडम के पीछे न भागो।
जनता का भरोसा है,
आपके हाथों में एक किताब,
जिसे खोलो, पढ़ो, समझो,
और लिखो उनके सपनों का जवाब।
-प्रियंका सौरभ उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार
(हरियाणा)-127045 (मो.) 7015375570