मनोरंजन

गीतिका – मधु शुक्ला

सीख लें यदि कष्ट में हम मुस्कराना,

अति सरल कर्तव्य को होगा निभाना।

 

हर्ष पाती माँ सदा क्यों साधना से,

प्रिय उसे है त्याग ममता का ठिकाना।

 

गर्व से सैनिक उठा कर ध्वज चले क्यों,

देश ही उसको लगे‌ उत्तम खजाना।

 

मोह क्यों संतान से अति लोग रखते,

चाहें हँसकर शाम जीवन की बिताना।

 

जोड़ना नाता अगर‌ हो परम सुख से,

सीख लें हम लोग रोते को हँसाना।

— मधु शुक्ला,सतना, मध्यप्रदेश

Related posts

गीत – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

जल संरक्षण के लिए भागीरथ, भोज और छत्रसाल की अटल विरासत के संवाहक मोदी – विष्णुदत्त शर्मा

newsadmin

हिन्दी सेवी सम्मान से अलंकृत हुए कवि अशोक कुमार यादव

newsadmin

Leave a Comment