मनोरंजन

गजल – रीता गुलाटी

छत भी टूटी हुई थी खुली खिड़कियाँ,

आज  रोता  बड़ा दर्द मे सिसकियाँ।

 

खूब हमने मनाया उन्हे प्यार से,

हाय फिर भी रही यार से तल्खियां।

 

क्यो मैं लिखती रही दर्द वाली गजल,

लोग ढूँढे मुझी मे सभी खामियाँ।

 

आज टूटा कहर जिंदगी मे बड़ा,

फिर गिराने लगा आँसमा बिजलियाँ।

 

प्यार से दिल बड़ा मुस्कुराने लगा।

देख कर आज तेरी हँसीं शोखियाँ।

– रीता गुलाटी ऋतंंभरा, चंडीगढ़

Related posts

किलकल किलकरिया (सोहर गीत) – श्याम कुंवर भारती

newsadmin

गर्मी का कहर – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

newsadmin

और इस तरह – रश्मि मृदुलिका

newsadmin

Leave a Comment