मनोरंजन

गजल – रीता गुलाटी

करती है जो मेहनत को मंजिल भी वो पाई है,

हिम्मत से ही जिसने की अब बहुत पढ़ाई है।

 

यादो मे तेरी हम भी डूबे हैं बड़े अब तो,

माशूक की यादो से कब मिलती रिहाई है।

 

डूबे है तेरी मस्ती मे अब तो उतरने को,

इन महकी फिजाओं ने फिर याद दिलाई है।

 

जीते रहे हैं हम भी तो शर्म के परदे मे,

कुछ वक्त गुजारे हम भी इसमे भलाई है।

 

मर जायेगें गर हम तो खोजेगी निगाहें भी,

सोचोगे पिया तुम भी क्यो वक्त गँवाई है।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

Related posts

ये लो माटी तिलक करो – अनुराधा प्रियदर्शिनी

newsadmin

गीत – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

भोजपुरी होली गीत – श्याम कुमार

newsadmin

Leave a Comment