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गीत – जसवीर सिंह हलधर

मेरी बात करो मत भैया ,तुम अपना घरवार सँभालो ।

मैं तो खतरे से बाहर हूँ ,तुम अपना संसार सँभालो ।।

 

संघ राज्य बतलाते मुझको,नाम राष्ट्र का नहीं लिखाये ।

अब भी मुझमें छिपे हुए हैं ,ब्रिटिश कानूनों के साये ।

मुझको ढाल बनाने वालों , तुम अपनी तलवार सँभालो ।।

मेरी बात करो मत भैया ,तुम अपना घरवार सँभालो ।।1

 

जब भी पाया तुमने मौका ,देते आये मुझको धोखा ।

सौ से ज्यादा घाव दिए हैं ,संसद में सब लेखा जोखा ।

मेरी घायल देह न देखो ,अपने मनोविकार सँभालो ।।

मैं तो खतरे से बाहर हूँ ,तुम अपना संसार सँभालो ।।2

 

तुम बैठे हो घात लगाए ,मिल कैसे सरकार गिरायें ।

अपने अपने युवराजों को ,गद्दी का हकदार बनायें ।

मेरे रोग गिनो मत भाई ,खुद अपना उपचार सँभालो ।।

मेरी बात करो मत भैया , तुम अपना घरवार सँभालो ।।3

 

मुझको धर्म हीन बतलाकर ,तुमने ही निरपेक्ष बनाया ।

बिना आत्मा के क्या कोई ,जीवित रह सकती है काया ।

मेरी नीव न खोदो अब तुम खुद अपनी दीवार सँभालो ।।

मैं तो खतरे से बाहर हूँ , तुम अपना संसार सँभालो ।।4।।

जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

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