मनोरंजन

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

जनवरी को जून बतलाने लगे हैं आज वो,

धार्मिक उन्माद उकसाने लगे हैं आज वो ।

 

फिर चुनावों के लिए तैयारियां हैं जोर से ,

हिंदुओं पर खूब चिल्लाने लगे हैं आज वो ।

 

राजनैतिक धर्म इतना गिर चुका है साथियों ,

सभ्यता को रोग समझाने लगे हैं आज वो ।

 

चैनलों पर मज़हबी चौपाल अब सजने लगीं ,

नफरतों की रागिनी गाने लगे हैं आज वो ।

 

सोचकर हैरान हूं क्या हो रहा है मुल्क में ,

जातियों में आग फड़काने लगे हैं आज वो ।

 

मछलियों में खलबली है खौफ़ है दरियाब में ,

सिंधु के ठहराव खाने लगे हैं आज वो ।

 

देखकर कौतुक अनौखे रो रही है भारती ,

भाषणों में रोज धमकाने लगे हैं आज वो ।

 

कौन जाने अंत “हलधर” लोभ लालच का यहां,

देश के सद्भाव को ढाने लगे हैं आज वो ।

– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

Related posts

ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस: फिर से चिंता में डूबी दुनिया – प्रियंका सौरभ

newsadmin

“मौन की मुस्कान” – चुप्पियों के शब्दों में गूंजती स्त्री की आत्मा – ✍️ डॉ. पूर्णिमा, अमृतसर

newsadmin

ग़ज़ल – विनोद निराश

newsadmin

Leave a Comment