मनोरंजन

गजल – ऋतु गुलाटी

हमेशा प्यार बसता हो, नही गम का समन्दर हो,

मुहब्बत संग चाहत हो नही अब यार महवर हो।

 

बनो दुल्हन पिया की तुम, निभाना साथ दिलबर का,

खुशी से अब जियो तुम भी बड़ा प्यारा मुकद्दर हो।

 

सजा लो आज तुम खुद को,लगा लो तुम महावर भी,

सजें आँचल सितारो से, खुशी से अब भरा घर हो।

 

बनो प्यारी सजन की,चाहते हैं तुम्हें भी वो,

निछावर प्यार तुम करना वही तेरे ही रहबर हो।

 

सदा पहनो बहारो के ही गहने जिंदगी मे *ऋतु,

उठे आवाज कोई भी सदा वो घर के अंदर हो।

– ऋतु गुलाटी  ऋतंभरा, मोहाली , पंजाब

Related posts

मेरी परिभाषा – रश्मि मृदुलिका

newsadmin

आजादी के 75 वे अमृत महोत्सव पर विराट काव्य संध्या आयोजित

newsadmin

दीया माटी का जले – डॉo सत्यवान सौरभ

newsadmin

Leave a Comment